पूर्वांचल की सियासत में नयी इबारत लिख सकती है बृजभूषण-योगेश की मुलाकात!

Gonda Politics: 

 May 01, 2025

 

 ‘वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों, नाविक की धैर्य कुशलता क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हों।’ पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह कविता की इन पंक्तियों को अक्सर अपने भाषणों में दोहराया करते हैं। उन्हें करीब से जानने-समझने वाले कहते हैं कि यही उनके जीवन का आधार रहा है। छात्र जीवन से लेकर राजनीतिक करियर में तमाम उतार-चढ़ाव देखने वाले बृजभूषण को वैसे तो आसान राहों का सफर अच्छा नहीं लगता है, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी में जिस तरह से उनके दबदबे और रसूख को दबाने का काम किया गया, वह राजनीति के इस महायोद्धा को कचोटती आ रही है, जिसे वह अक्सर बयां भी कर देते हैं।


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