जान हथेली पर लेकर भीषण गर्मी में शिक्षामित्र व अनुदेशक बच्चों को सिखा रहे योगा, कबड्डी,उछलकूद, चला रहे समर कैंप


फर्रुखाबाद । ऊर्जावान, स्पूर्तिवान, कर्तव्यनिष्ठ और देवतुल्य युवा शिक्षामित्र है। इनके कंधे बहुत मजबूत है। इसी वजह से तपती धूप की गर्मी और लू लपट में इनको बेसिक शिक्षा विभग के उच्च कंपोजिट विद्यालयों में शक्ति परीक्षण के लिए बचों को योगा, कबड्डी, उछल कूद, भाग दौड़ सिखाने भेजा गया है।
 यह संविदा कर्मी और इनकी मोटर साइकिलें हवा और सूर्य की किरणों से भोजन ग्रहण कर चलती रहती है। इन संविदा कर्मी शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को लू लपट गर्मी सर्दी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। क्योंकि यह दूसरे लोक परलोक के एलियन है। इन्हें रुपया पैसा धन दौलत की आवश्यकता नहीं होती।

मजदूरों से भी कम मजदूरी में आर्थिक स्थिति अत्यंत गंभीर होने से हजारों हजार शिक्षा मित्र संविदा कर्मियों की बेमौत मौतें हो चुकी है। बचे खुचे संविदा कर्मी शिक्षा मित्र समर कैंप के दौरान लू लपट लगने से यदि कोई मौत तो इनका जिम्मेदार कौन। लगभग सभी शिक्षा मित्र संविदा कर्मी इन गर्मी सर्दी की छुट्टियों में आर्थिक स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण मेहनत मजदूरी करने परिवार जनों सहित एक माह के लिए बाहर निकल जाते थे, 

लेकिन इस बार शिक्षामित्रों से द्वेष भावना और राजनैतिक कारणों की वजह से इस बार समर कैंप के बहानें इतनी तेज धूप की तपती गर्मी में बेमौत काल के गाल में सिधारने भेजा दिया गया। इससे हजारों हजार शिक्षामित्र संविदा कर्मी मानसिक तनाव और ब्रेन हेमरेज जैसी मौतों और कई शिक्षा मित्र साथियों द्वारा आर्थिक स्थिति अत्यंत गंभीर होने से आत्महत्या जैसी हृदय विदारक मौतें से सरकार और सरकार के मठाधीशों को क्या खुशी मिलती है। शिक्षामित्र अरविन्द करन आर्य बताते हैं। 

सरकार द्वारा एक गाइड लाइन स्पष्ट कर दी जाये कि शिक्षामित्रों कर्मियों का एक भी पैसा मानदेय वृद्धि नहीं की जाएगी। कम से कम शिक्षामित्र संविदा कर्मी मानदेय वृद्धि की झूठी खबरों से बेमौत काल के गाल में समा गये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का समर कैंप ड्रीम प्रोजेक्ट इसकी सजा संविदा कर्मियों को न दें। 25 दिन का 120 रुपये के हिसाब से 3000 हजार रुपये देने की बात कही जा रही है। आज कल जहां दिहाड़ी 700 रुपये चल रही है। जहां भीषण गर्मी में 300 रुपये देना न्याय संगत में नहीं है।

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