मां का शव लेकर खुद पोस्टमार्टम कराने पहुंचा 8 साल का बच्चा, रिश्तेदारों से नहीं मिली मदद तो थाना प्रभारी ने ली अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी.बच्चे की मां लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. उनकी मौत HIV संक्रमण के कारण हुई. पिता की मौत भी एक साल पहले इसी बीमारी से हो चुकी थी. मामला एटा जिले का है.

महज 8 साल का एक बच्चा, जो खुद अभी मां की गोद में होना चाहिए था, अपनी मां का पोस्टमॉर्टम करवा रहा था। कफन में लिपटी मां की लाश के पास वह देर तक बैठा बिलखता रहा। कभी नन्हीं आंखें मां के चेहरे को ढूंढतीं, कभी कांपते हाथों से अपने आंसू पोंछता। उसकी सिसकियों में ऐसा सन्नाटा था, जो वहां मौजूद हर किसी का दिल चीर गया।


पोस्टमॉर्टम हाउस में खड़े पुलिसकर्मी और लोग भी खुद को संभाल नहीं पाए। एक शख्स ने आगे बढ़कर बच्चे के कंधे पर हाथ रखा, जैसे उस टूटे हुए भरोसे को थामने की कोशिश कर रहा हो। लेकिन कौन भर सकता था उस खालीपन को?

बच्चे के पिता की एक साल पहले एचआईवी (एड्स) से मौत हो चुकी थी। अब उसी बीमारी ने मां को भी छीन लिया। मां-बाप दोनों चले गए, और घर में बचा तो सिर्फ यह मासूम और उसकी 13 साल की बहन।

मां की लाश को कंधा देने वाला भी कोई नहीं था। पूरे 17 घंटे बाद कुछ रिश्तेदार पहुंचे, तब कहीं जाकर पंचनामा के लिए गवाह जुट पाए। हालात की बेरुखी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आखिरकार एक इंस्पेक्टर को मृत महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।

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