बेटियां कैसे डॉक्टर बनेगी गर्ल्स हॉस्टलों का काला सच एक होनहार बेटी की मौत और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल हैं

बेटियां कैसे डॉक्टर बनेगी गर्ल्स हॉस्टलों का काला सच एक होनहार बेटी की मौत और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल हैं

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही 17 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि शिक्षा के नाम पर चल रहे कथित गर्ल्स हॉस्टलों, पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली और सत्ता-तंत्र के गठजोड़ पर बड़ा सवाल है।
मृतका भूमिहार समाज की बेटी थी, गरीब माता-पिता की संतान, जिसने पहले ही डेंटल डॉक्टर बनने की परीक्षा पास कर ली थी। उसका सपना था AIIMS से MBBS कर डॉक्टर बनना। पढ़ाई के लिए वह पटना आई, गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। लेकिन अब वही शहर, वही हॉस्टल, उसकी मौत का गवाह बन गया।

हैरानी की बात यह है कि पटना के तत्कालीन एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के निर्देश पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को आत्महत्या घोषित कर दिया गया। जबकि बाद में आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर 12 जगह खरोंच और चोट के निशान पाए गए। सवाल सीधा है
क्या कोई लड़की आत्महत्या करने से पहले खुद को इतनी जगह घायल करती है?
मामले में संदेह और गहराता है जब यह सामने आता है कि

- छात्रा को चार दिनों तक सामान्य अवस्था में अस्पताल में रखा गया,
- पुलिस को सूचना दिए बिना हॉस्टल मालिक द्वारा कमरे का दरवाज़ा तुड़वाया गया,
- परिजनों द्वारा हत्या की आशंका जताने के बावजूद जांच में गंभीरता नहीं दिखाई गई,
- और स्थानीय लोगों द्वारा पहले से हॉस्टल के खिलाफ शिकायतें होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पोस्टमॉर्टम और मेडिकल संकेत यह भी बताते हैं कि छात्रा को नशे का इंजेक्शन दिए जाने, यौन शोषण या गैंगरेप की कोशिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। नशे की हालत को “नींद की गोली” कहकर खारिज किया जा रहा है, जबकि परिस्थितियाँ कुछ और ही कहानी कहती हैं।

सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि जिस गर्ल्स हॉस्टल में छात्राएँ रहती थीं, उसके बाहर फॉर्च्यूनर, सफारी, इनोवा जैसी महंगी गाड़ियाँ नियमित रूप से क्यों आती थीं? आखिर कोई करोड़पति व्यक्ति गर्ल्स हॉस्टल क्यों चलाएगा? यह सिर्फ संयोग है या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क?

चित्रगुप्त नगर की थानाध्यक्ष स्वयं महिला हैं, फिर भी पुलिस का यह रवैया भ्रष्टाचार और सांठगांठ की ओर इशारा करता है। मृतका के मामा ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि केस रफा-दफा करने के लिए 15 लाख रुपये तक का ऑफर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इलाज के दौरान छात्रा होश में थी और अपनी मां से कुछ कहना चाहती थी, लेकिन डॉक्टरों ने उसे बेहोशी की दवा देकर चुप करा दिया।


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