10वीं बोर्ड की परीक्षा देने जा रही छात्रा ने दिखाई हिम्मत..दुर्घटना के बाद गंभीर चोट लगने के बावाजूद गई परीक्षा देने

10वीं बोर्ड की परीक्षा देने जा रही एक छात्रा अपने भाई के साथ बाइक पर बैठी थी। हाथ में एडमिट कार्ड, 
आंखों में सपने… और दिल में थोड़ा सा डर। परिवार की उम्मीदें, अपने भविष्य की चिंतासब कुछ उस छोटी सी बच्ची के कंधों पर था।


लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था।

रास्ते में अचानक बाइक का संतुलन बिगड़ा… और एक भयानक एक्सीडेंट हो गया। दोनों सड़क पर जा गिरे। भाई को हल्की चोटें आईं, लेकिन लड़की सीधे सड़क पर गिरी। उसके हाथ, पैर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट लग गई। आसपास लोग इकट्ठा हो गए। किसी ने पानी दिया, किसी ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की।

सबको लगा कि अब यह बच्ची रो पड़ेगी… घबरा जाएगी… परीक्षा तो अब छूट ही जाएगी।

लेकिन जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया।

वो दर्द से कराहने के बजाय… मुस्कुरा रही थी।
हाँ, वो हँस रही थी।

किसी ने पूछा बेटा, इतनी चोट लगी है… रो क्यों नहीं रही?”
उसने धीमी आवाज़ में कहा –
रोने से पेपर तो नहीं रुकेगा ना… मुझे एग्जाम देना है।”

उसकी ये बात सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
खून बह रहा था, कपड़े फट चुके थे लेकिन हिम्मत सलामत थी।

परिवार वाले उसे तुरंत अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद, डॉक्टरों ने हालात स्थिर देखे तो लड़की ने जिद पकड़ ली
“मुझे परीक्षा केंद्र ले चलो।”

पट्टियां बंधी हुई थीं… दर्द साफ दिख रहा था… लेकिन चेहरे पर वही मुस्कान थी।
वो परीक्षा केंद्र पहुंची… और अपना पेपर दिया।

ये कहानी सिर्फ एक एक्सीडेंट की नहीं है…
ये कहानी है उस जज़्बे की, जो कहता है 
“मुश्किलें आएंगी… पर मैं रुकूंगी नहीं।”

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