6 माह की मासूम को दी एक्सपायरी दवा.. डॉक्टर की. लापरवाही से मासूम की हुई मौत

हैदराबाद के बंडलागुड़ा जागीर–सन सिटी इलाके में छह महीने के मासूम की कथित तौर पर एक्सपायर्ड दवा दिए जाने के बाद मौत की खबर ने दिल दहला दिया है। जब इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया बच्चा सुरक्षित घर लौटने के बजाय मौत का शिकार हो जाए, तो यह केवल हादसा नहीं, व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न है।


परिजनों का आरोप है कि बुखार के इलाज के दौरान डॉक्टरों ने एक्सपायर्ड दवा दे दी, जिसके बाद बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ गई। अगर यह आरोप सही है, तो यह सिर्फ एक मानवीय भूल नहीं, बल्कि पेशेवर लापरवाही की पराकाष्ठा है।

अस्पतालों में दवाओं की एक्सपायरी की नियमित जांच, स्टॉक मॉनिटरिंग और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। एक छह महीने के शिशु को दी जाने वाली दवा में इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है? क्या प्रोटोकॉल सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?

चिकित्सा सेवा भरोसे पर चलती है। मरीज और उनके परिवार डॉक्टरों पर आंख मूंदकर विश्वास करते हैं। ऐसे मामलों से वह भरोसा गहराई से टूटता है और पूरे स्वास्थ्य तंत्र की साख पर असर पड़ता है।

जरूरी है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, दोष तय हो और कड़ी कार्रवाई की जाए। एक मासूम की जान लौट नहीं सकती, लेकिन जवाबदेही तय होना ही ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने की पहली शर्त है।

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